कमर और गर्दन दर्द को कहें अलविदा

आमतौर पर जुकाम, खाँसी और सिरदर्द के पश्चात कमर दर्द ही मुख्य समस्या है। यह अनुमान लगाया जाता है कि 80 प्रतिशत लोग किसी न किसी तरह की स्पाइन सम्बन्धित समस्याओं से घिरे होते है, जिसके परिणामस्वरूप थोड़े समय पश्चात्‌ वे गर्दन व कमर दर्द के शिकार हो जाते है| 90% प्रतिशत लोगो को झुकने, वजन उठाने व गलत तरीके से बैठने, उठने, सोने व खड़े रहने के कारण कमर दर्द की शिकायत रहती है।
उदाहरण के लिये, अगर एक 25 वर्षीय व्यक्ति एक दिन में 8-0 घंटे कार्यालय में रहता है तो वह 2 वर्ष में कमर में दर्द महसूस करने लग जाता है। अगर तभी ध्यान न रखा जाये तो 0 वर्ष मे किसी गंभीर व जटिल समस्या से ग्रसित हो सकता है।
वित्तीय हानि :
इस प्रकार के प्रत्येक रोगी को दर्द के समय 42-45 दिन के लिये आराम की जरूरत होती है जिसके परिणामस्वरूप काम रूकने की वजह से आय-हानि तो होती ही है, साथ ही साथ वह उपचार का अतिरिक्त खर्चा बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप निम्नलिखित परिस्थितियों में से एक परिस्थिति उभरती है!

  • काम में रूकावट
  • कार्य में परिवर्तन जो सम्भव नहीं
  • कार्य करने के तरीके में परिवर्तन
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रीढ़ की हड्डी की मूल बातें

  • रीढ़ की हड्डी के चार कर्व होते हैं जो आपके संतुलन और सीधे खड़े होने में मदद करते हैं
  • रीढ़ की हड्डी बोनी ब्लॉक्स या मानकों से बनी है | सब मनके एक दूसरे एक ऊपर जुड़े होते हैं। हर दो मानकों के बीच में डिस्क होती है।गर्दन में सात मनके, ऊपरी कमर में बारह और निचली कमर में पाँच मनके होते हैं | ये सब नीचे सेक्रम और टेल बोन से जुड़े होते हैं।
  • डिस्क मानकों के बीच में कुशन की तरह काम करती हैं | ये एक सख्त बाहरी कवरिंग से बनी होती है और उसके अंदर एक जेल्ली जैसा पदार्थ होता है। डिस्क उपरी और निचले मानकों को जोड़ती हैं और महत्वपूर्ण दबाव सहन करने में मदद करती हैं ।

रीढ़ की हड्डी के मुख्य कार्य हैं :-

  • धड़ और सर का समर्थन
  • शरीर के लचीलेपन में मदद
  • रीढ़ की नस की रक्षा

एक अच्छी मुद्रा बनाए रखना

  • खराब मुद्रा या आसन आपके रीड़ की मॉसपेशियों में तनाव पैदा कर सकते हैं।
  • गुरूत्वाकर्षण हमेशा हमें नीचे खीचने की कोशिश करती हैं और इसके साथ अगर खराब आदतें भी हों तो वो हमें ऐसे पदों में खड़े और बैठने में मजबूर करती हैं जिससे कमर में दर्द होता है ।
  • जब हम इन गलत और अजीब मुद्राओं और आसनों में रहते हैं तो हमारी कमर की माँसपेशियों पर तनाव पड़ता है और कमर का दर्द बढ़ता है।
  • अच्छी मुद्रा को सीखने और अभ्यास करने से कमर के दर्द को रोका जा सकता है।

बैठने के सही आसन (तरीके)

जब भी आप बैठें, आपकी कमर के पीछे सहारा अवश्य हो। ऐसी कुर्सियों पर ना बैठें, जिसमें सही प्रकार के पीछे के विश्राम व दोनों तरफ के भुजाओं के विश्राम के हत्थे न हों। जब आप बैठें तब आपके पैर जमीन पर टिके होने चाहिए। सही तरह की कुर्सियाँ इस्तेमाल न करने पर मॉसपेशियों में कमजोरी आ सकती है जो कमर दर्द में परिवर्तित हो सकता है।

अच्छी कुर्सी का मापदण्ड

कुर्सी के पीछे का भाग समान्तर से 105 डिग्री कोण होना चाहिए और कुर्सी की सीट की लम्बाई 17 इंच होनी चाहिए क्‍योंकि ज्यादा लंबाई होने पर कमर को सही सहारा नहीं मिलता इसलिए ऐसी कुर्सियो पर बैठते तकिये या कुशन को पीछे रखें ताकि कमर को सहारा मिल सके | लो बेक कुर्सियाँ या सोफे पर बैठने से कमर को सही तरीके से सहारा नहीं मिलता है।

पायदान :
जब आप करर्सी पर बैठें तो आपके घुटनों की स्थिति जांघों से थोड़ी ऊपर होनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर सही ऊँचाई वाले पावदान का घुटने को ऊपर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस प्रकार से बैठने का तरीके आपके कमर की मौँसपेशियों में खिंचाव को रोकता है। जरूरत पड़ने पर पाँव के नीचे पावदान रखकर पाँव को ऊँचा रखें, जिससे कमर की मॉँसपेशियों पर खिंचाव / तनाव नहीं आता है।
झुकावदार पेड :
लिखने या पढ़ने के लिए व पेड/टेबल टॉप पेड का उपयोग करें। टेबल ऐसी हो जो सामने की तरफ से आपकी कमर से थोड़ी ऊँची हो तथा दोनों तरफ से कमर के बराबर हो ताकि आप गर्दन सीधी रखकर
काम कर सकें। कम्प्यूटर का ज्यादा उपयोग करने वाले लोगों को कम्प्यूटर की स्क्रिन आँखों की सीध में रखनी चाहिए और की बोर्ड को इस तरह रखें कि कोहनी से कलाई तक का हाथ टेबल पर रहे जिससे हाथ की मॉसपेशियाँ थकानमुक्त रहे। यदि कागज में देखकर टाईप करना हो तो उसे स्पेशन स्टेन्ड पर सीधा रखे ताकि गर्दन को फिजूल में ऊपर नीचे हिलाना न पड़े।
हत्थेदार कुर्सी का उपयोग :
बैठने के लिए हत्थेदार कूर्सी का उपयोग करें जिससे हाथ व कंधे दोनों का सहारा मिलता है। यह आपको मॉँसपेशियों के खिंचाव तत्पश्चात दर्द से बचाती है।

कार में बैठने का सही तरीका

कार में बैठने के लिए कार का दरवाजा खोलकर बाहर की तरफ मुड़ते हुए पहले सीट पर बैठ जाएं | फिर एक के बाद एक पांव उठाकर अंदर रखें | गाड़ी चलाते समय, जितनी हो सके, सीट को स्टीयरिंग के पास रखें एवं जरूरत हो तो सीट और कमर के बीच में छोटा कुशन रखें ।
>कार में सही मुद्रा

  • कार में फूट पेडल्स और स्टियरिंग वील से आरामदायक दूरी बनाए रखें ।
  • कार में पीछे होकर एक आरामदायक पोजिशन में रहने से कमर को सहारा मिलता है।
  • अगर सीट आपकी कमर को सहारा नहीं देती तो कमर के पीछे कुशन या मुड़ा हुआ टवल रखें|
  • अगर आप लंबे दूरी की ड्राइव पर जाते हैं तो आप नियमित समय में ब्रेक लीजिए |

खड़े रहने का सही तरीका

लंबे समय तक खड़े रहने से कमर दर्द की तकलीफ हो सकती है| ऐसी परिस्थिति में एक पांव को पावदान पर रखकर खड़े रहें| थोड़े समय पश्चात पांव की अदला-बदली करें | पावदान के उपयोग से कमर की माँसपेशियों को आराम मिलता है।
सही जूते :
ऊँची एडीवाले जूते पहनने से कमर की माँसपेशियाँ अत्याधिक तनाव में रहती है इसलिए लंबे समय तक खड़ा करना हो तो बिना एड़ी वाले जूते पहनना ही हितकर है|
घंटों तक कैसे खड़े रहें :
आर्किटेक्ट, डिजाईनर आदि कार्य के लिए टेबल की ऊँचाई कोहनी तक होनी चाहिए। टेबल की समतल से 20 डिग्री कम से कम ढाल होनी चाहिए जिससे आगे झुके बिना काम किया जा सके |

सोने का सही तरीका

सोने के उपयोग में लिए जाने वाला गददा न तो अधिक नरम और न ही अधिक सख्त होना चाहिए | यदि पलंग अधिक ऊँचाई पर हो तो सोने व उठने के लिए पावदान का उपयोग करें |

  • कमर दर्द होने पर झालेदार खटिया अथवा ढीली रस्सी वाले पलंग पर सोने से दर्द बढ़ेगा।
  • सोते समय नरम तकिया घुटनों के नीचे रखने से माँसपेशियाँ तनावमुक्त होती है और दर्द में राहत मिलती है।
  • कमर दर्द होने पर, बिना गद्दे के जमीन पर न सोयें, पेट के बल न सोयें, करवट लेकर सोयें |

सोने व उठने का सही तरीका :
दिये गये चित्रों को देखें ।

  • दाहिनी अथवा बाहिनी कोहनी को सहारा लेते हुए उठें।
  • दोनों पांव को पलंग के नीचे जमीन पर रखें |
  • पहले अच्छी तरह बैठे फिर ही नीचे उतरे ।

सही तकिये का उपयोग
ऐसा माना जाता है कि गर्दन में दर्द होने पर तकिये का उपयोग नहीं करना चाहिए जबकि गलत मान्यता है। किस नाप का तकिया इस्तेमाल करना चाहिए यह जानने के लिए दीवार से सटकर खड़े हो जाऐं | गर्दन व दीवार के बीच की जगह में जो तकिया आए, वही इस्तेमाल करें| सोते समय तकिये को सिर्फ गर्दन के नीचे न रखें परन्तु कन्धे तक रखें जिससे गर्दन र्के सभी माणकों को सहारा मिले |

वजन उठाते समय बरती जाने वाले एहतियात

  • जमीन पर पड़ी हुई वस्तु को उठाने के लिए कमर से ना झुकें |
  • कमर को सीधी रखते हुए घुटनों को मोड़ते हुए बैठें, वजन को आकृति में दिखाए अनुसार उठाएं |
  • वस्तु को उठाकर शरीर से नजदीक रखें, जिससे कमर के माणकों पर दबाव न आए |
  • दोनों हाथों में समान वजन उठाएं | उदाहरण के लिए एक हाथ में पानी की भरी हुई बाल्टी उठाने की बजाए दोनों हाथों में आधी भरी हुई बाल्टियाँ उठाएं |

भारी बैग कैसे उठाएँ

  • भारी बेग को कंधे पर ना उठाएँ।
  • बैग को कंधे पर क्रॉस-कोण के रूप में लें।
  • इस तरीके से रीड़ की हड्डी एक संतुलित स्थिति में रहती है।

स्कूल जाते बच्चोंके लिए सलाह

बच्चों को कंधो पर आए ऐसे दो पट्टे वाली बैग का उपयोग करना चाहिए | जिससे वजन दोनों तरफ समान रूप से वितरित हो सके और स्पाइन दबाव मुक्त रहे |
खींचने से धक्का मारना बेहतर :
जब किसी बल को विसकाना हो तो खींचने से बेहतर उसे धक्का मारकर
खिसकाना उचित रहता है।
गृहकार्य करते समय शरीर की सही स्थिति :
झाड़ू, पोंछा, बिस्तर करते समय कमर की बजाए घुटनों से शरीर को झुकाएं |
सफाई के लिए वैक्यूम क्लीनर एवं डंडे वाले पोछे का इस्तेमाल करें|
यदि आप घुटनों के दर्द से पीड़ित है तो रसोईघर में खाना बनाते समय प्लेटफार्म के बराबर स्टूल पर बैठकर काम करें।

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वॉश-बेसिन की ऊँचाई कितनी हो?

रोजमर्रा के कामों में हम वॉश-बेसिन का बार-बार उपयोग करते हैं, यदि उसकी ऊँचाई सही न हो तो बार-बार रा की वजह से का समय में तकलीफ हो सकती है। वॉश-बेसिन की ऊँचाई कमर की ऊँचाई या उससे थोड़ी ज्यादा होनी चाहिए | रसोईघर के वॉश-बेसिन और प्लेटफार्म के किनारी के बीच अंतर नहीं होना चाहिए | अगर वॉश-बेसिन आगे होगा तो आगे झुककर काम करना पड़ेगा जिससे कमर दर्द हो सकता है| नल की ऊँचाई भी ऐसी होनी चाहिए कि काम करते समय झुकना ना पड़े |

गर्भावस्‍था दरम्यान कमर दर्द

  • गर्भावस्‍था दरम्यान कमर दर्द की समस्या सामान्य है जिसके लिए सही प्रकार से कसरत करना आवश्यक है।
  • सीधे सोते समय, बुना से पैर मोड़कर अथवा घुटनों मा, नीचे तकिया रखें जिससे कमर की | पर दबाव न पड़े |
  • करवट लेकर तथा घुटनों को एक-दूसरे के ऊपर रखते हुए पैरों के बीच में रखकर सोना चाहिए
  • बच्चे को दूध पिलाते समय करवट लेकर सोयें या सीधें बैठे और बच्चे को गोद में तकिया रख उस पर सुलाकर दूध पिलाएं
  • बच्चे के कपड़े बदलते समय बच्चे को टेबल पर सुलाएं ताकि बार-बार झुकना ना पड़े ।
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बच्चों में कमर व गर्दन की स्थिति

  • सामान्यता बच्चों को कमर या गर्दन दर्द नहीं होता लेकिन सावधानी बरतनी अच्छी है | बच्चे की पढ़ाई की टेबल की ऊँचाई बच्चे की कमर से थोड़ी ऊँची होनी चाहिए
  • पढ़ने अथवा लिखने के लिए इनक्लिनेशन पैड का इस्तेमाल करें जिससे पीठ से झुके बिना एवं गर्दन सीधी रखते हुए पढ़ा लिखा जा सके |
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गलत आदतें

  • वसायुक्‍तखाने एवं निष्क्रिय तरीके से जीवनयापन से शरीर का भार बढ़ता है | मोटापे से कमर दर्द को बढ़ावा मिलता है | मोटे पेट / तोंद के कारण पीठ एवं कमर के माणकों पर दबाव बढ़ता है और उनमें दर्द रहता है।
  • तंबाकू का सेवन खून में निकोटीन बढ़ाता है जिससे नसें सिकुड़ जाती है और डिस्क या माँसपेशियों में तकलीफ होने पर ठीक होने में समय लगता है व लंबे समय तक दर्द रहता है।
  • मोबाईल फोन को गर्दन और कंधे के बीच रखकर गाड़ी चलाने या अन्य कार्य करने से गर्दन दर्द की संभावना बढ़ जाती है। हेडफोन या ब्लूटूथ तकनीक का उपयोग करने से गर्दन को सीधा रखकर काम किया जा सकता है।

सक्रिय हो

शारीरिक स्वास्थय : बताए हुए 4 उदाहरण कमर के लिए घातक होते है। कमर दर्द के रोगियों के लिए तैरना बहुत अच्छी कसरत होती है और कमर की माँसपेशियों को बिना किसी तनाव के अच्छी कसरत मिलती है। कमर तक गहरे पानी में घूमना भी एक अच्छी कसरत है |

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तनाव को कम से कम रखें

  • तनाव पीठ दर्द के विकास के लिए हानिकारक हो सकता है और यह भी दर्द बड़ा सकता है | यह महत्वपूर्ण है इसलिए हम इसे नियंत्रण में रखने की कोशिश करनी चाहिए |
  • जब आप चिंतित होते हैं, आपकी मांसपेशियों में तनाव होता है| यह पीठ दर्द का कारण बन सकते हैं और अगर आप पहले से पीठ दर्द से पीड़ित हैं तो इसे और खराब कर सकता हैं |
  • तनाव से संबंधित पीठ दर्द को कम करने के लिए तनाव को अपने जीवन में पहचानना सीखें|
  • ऐसे तरीके ढूँढने की कोशिश करें जिसकी मदद से आप तनाव को दूर कर पाएं।
  • शारीरिक गतिविधि और व्यायाम तनाव और चिंता को दूर रखने में मदद करते हैं।

कमर दर्द में आपात स्थिति

निम्नलिखीत परिस्थितियों में स्पाईन विशेषज्ञ से आपातकालीन मदद लें :

  • घूमते समय कमजोरी महसूस होने पर
  • झनझनाहट या गम्भीर दर्द, खड़े या घूमते समय
  • चुभन महसूस हो
  • पैरों में ऐठन आना
  • पूर्ण अथवा आंशिक पेरालाईसिस
  • मल और मूत्र नियन्त्रण खोना
  • भंयकर घाव के बिना स्पाईन में क्षतिग्रस्तता